Uttarakhand: यूटीयू पेपर लीक, गोपनीय प्रक्रिया पर उठे सवाल

UTU: पेपर लीक के बाद गोपनीय प्रक्रिया पर सवाल; इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी का पेपर भी आरोपी ने बनाया
हिंदी टीवी न्यूज, देहरादून। Published by: Megha Jain Updated Fri, 24 Jul 2026
उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की गोपनीय प्रक्रिया के बावजूद प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने से पूरी परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) से संबद्ध संस्थानों में हुई सम-सेमेस्टर परीक्षाओं के अन्य विषयों में भी गड़बड़ी की आशंका है। विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीके पटेल की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी का प्रश्न पत्र भी आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता ने तैयार किया था।
चयनित शिक्षक ने लीक किया प्रश्नपत्र
परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी बेहद गोपनीय तरीके से तय की जाती है, जिसमें कई स्तरों पर चयन और निगरानी की व्यवस्था रहती है। प्रक्रिया के तहत सबसे पहले विवि स्तर पर समन्वयक और जिला समन्वयक नियुक्त किए जाते हैं। इसके बाद विवि से संबद्ध कॉलेजों और संस्थानों के शिक्षकों में से योग्य शिक्षकों की एक सूची तैयार की जाती है। इसी सूची में शामिल नामों में से समन्वयक की ओर से प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए शिक्षक का चयन किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को इतना गोपनीय रखा जाता है कि संबंधित शिक्षक के संस्थान या कॉलेज तक को इसकी जानकारी नहीं होती। इसके बावजूद एक चयनित शिक्षक की ओर से प्रश्नपत्र लीक किए जाने की घटना ने व्यवस्था की विश्वसनीयता को झटका दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गोपनीय चयन प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही को भी मजबूत करना होगा। ऐसे में देखना होगा कि इस गंभीर चूक के बाद विवि अपनी व्यवस्था में क्या सुधार करता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। वहीं, विवि की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने बताया कि प्रश्नपत्र सेटिंग से जुड़ी पूरी प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय रखी जाती है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होती। प्रश्नपत्र तैयार करने वाले संबंधित व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह पूरे कार्य की गोपनीयता बनाए रखे। इतना ही नहीं, प्रश्नपत्र तैयार करने में उपयोग की गई सभी स्टेशनरी को कार्य पूरा होने के बाद नष्ट करने के भी निर्देश हैं। साथ ही, प्रश्नपत्र की डिजिटल कॉपी भेजने के बाद ईमेल ट्रेल को भी हटाने के निर्देश हैं। इस सख्ती का उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता व विश्वसनीयता बनाए रखना है।















