हिमाचल: कर्मचारी एक्ट पर सरकार की रिव्यू याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज

हिमाचल के कर्मचारियों के लिए राहत: सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी एक्ट पर सरकार की रिव्यू पिटीशन की खारिज
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला। Published by: Megha Jain Updated Fri, 30 Oct 2026
हिमाचल प्रदेश में अनुबंध कर्मचारियों के सेवा लाभ को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी एक्ट 2024 से जुड़े मामले में सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इससे करीब डेढ़ लाख कर्मचारियों के वित्तीय लाभ और वरिष्ठता से जुड़ी मांगों को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। अनुबंध कर्मचारियों को सेवा अवधि के लाभ देने से संबंधित हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एक्ट, 2024 को लेकर सरकार की ओर से दाखिल रिव्यू पिटीशन खारिज हो गई है। इस घटनाक्रम से प्रदेश के करीब 1.50 लाख कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
यह विवाद उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्होंने नियमित नियुक्ति से पहले कई वर्षों तक अनुबंध आधार पर सरकारी विभागों में सेवाएं दी हैं। कर्मचारियों की मांग रही है कि अनुबंध पर की गई सेवा को भी उनकी नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा लाभ और वरिष्ठता की गणना में शामिल किया जाए।
सरकार के खिलाफ इस कानूनी लड़ाई में कर्मचारियों को पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब पुनर्विचार याचिका भी खारिज होने से सरकार के सामने अदालत के पहले के फैसलों के अनुरूप कार्रवाई करने का सवाल खड़ा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद कर्मचारियों की निगाहें अब सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं। वे चाहते हैं कि अनुबंध अवधि में दी गई सेवाओं को पात्रता के अनुसार लाभों की गणना में शामिल किया जाए। इसका असर केवल वेतन और एरियर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वरिष्ठता और अन्य सेवा संबंधी लाभों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल इस मामले में सबसे अहम बात यह होगी कि राज्य सरकार अदालत के आदेशों को किस तरह लागू करती है और पात्र कर्मचारियों को उनका बकाया लाभ कब तक मिलता है।















