हिमाचल हाईकोर्ट: वैध RC के बिना वाहन चलाना बीमा शर्तों का उल्लंघन

अदालत: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- बिना वैध आरसी वाहन चलाना बीमा शर्तों का उल्लंघन, जानें पूरा मामला
हिंदी टीवी न्यूज, शिमला Published by: Megha Jain Updated Mon, 12 Oct 2026
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अस्थायी पंजीकरण की अवधि समाप्त होने के बाद वैध आरसी के बिना सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम और बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवा वकील के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अस्थायी रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त होने के बाद बिना वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) के सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम का गंभीर उल्लंघन और बीमा पॉलिसी की शर्तों का मूलभूत उल्लंघन है। हालांकि, पीड़ित परिवार को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि 72.67 लाख रुपये से बढ़ाकर लगभग 1.01 करोड़ रुपये कर दी है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) के एक फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर कोई सरकारी संस्था वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक करती है, तो उस बैठक में लिए गए फैसले पर शामिल सभी सदस्यों के हस्ताक्षर होने जरूरी हैं। सिर्फ अध्यक्ष (चेयरमैन) और सचिव के दस्तखत से जारी किया गया आदेश कानूनन मान्य नहीं होगा।
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने याचिकाकर्ता आनंद मोदगिल की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया। हाईकोर्ट ने माना कि बिना सभी सदस्यों के हस्ताक्षर वाले आदेश की कोई कानूनी मान्यता नहीं है और इसे लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने 31 जनवरी 2025 के विवादित आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया। इसके साथ ही एसटीए को निर्देश दिया गया है कि वह याचिकाकर्ता के आवेदनों पर अगले चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार करे और कानून के अनुसार आदेश पारित करे।
अथॉरिटी को निर्देश दिया गया है कि वह मोटर वाहन अधिनियम की धारा 72(1) व 80 और हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णयों को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला ले। याचिकाकर्ता ने शिमला-मनाली और शिमला-चंबा रूट के लिए स्टेज कैरिज परमिट प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत 31 अगस्त 2025 को एसटीए चेयरमैन के कार्यालय में बैठक हुई थी, जिसमें चेयरमैन के अलावा मेंबर सेक्रेटरी सहित अन्य 5 सदस्य और याचिकाकर्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भाग लिया था।















